सोमवार, 16 मई 2011

श्रेष्ठ प्रबंधक कौन ?

द्योगिक ज़ोन में दोनों फैक्ट्री एक ही साथ शुरू हुई थी। दोनों फैक्ट्री के मकान एवम उनकी बाह्य सुन्दरता देखते ही बनती थी, परन्तु दोनों में से एक फैक्ट्री विकास के मामले में पीछे रह गयी और दूसरी ने सिद्धिओं के शिखर को पा लिया।
विकास में पीछे रह जाने वाली फैक्ट्री के मालिक ने एक अधेड़ (बड़ी उम्र का व्यक्ति) के पास अपनी वेदना व्यक्त करी। अधेड़ ने कहा: "मुझे आपकी फैक्ट्री का अभ्यास करने के लिए एक महीने का समय दीजिये।" समस्या को जाने बिना अथवा तो उसमे डूबे बिना सलाह देने वाले सलाह मांगने वाले को डुबाते हैं। अधिकतर लोग बिना सोचे समझे सलाह दे दिया करते हैं। मनुष्य ने 'सलाहकार' नहीं, सलाहनिष्ठ बनना चाहिए, ऐसा मेरा मानना है। क्या आप राह देख सकेंगे? अधेड़ प्रत्युत्तर की राह में मालिक की और देखने लगा। 'हाँ' कह कर फैक्ट्री मालिक वहां से चला गया।
उस फैक्ट्री मालिक के चार पुत्र थे। उन्हें काम करने में नहीं, मात्र हुकुम फरमाने में ही रस था। उस अधेड़ की ध्यान में यह बात आ गयी और उसने अपनी डायरी में यह बात लिख ली: काम लेना यह भी एक कला है। जब तक मनुष्य उस कार्य में खुद गहराई से रस नहीं लेता तब तक उस कार्य में बरकत नहीं आ पाती। महत्त्व की बात यह है: योग्य कार्य के लिए योग्य व्यक्ति कि पसंदगी। मनुष्य को अगर आप सूक्ष्म मापदंडों से तौलेंगे तो उसकी आतंरिक योग्यताओं का ख्याल नहीं आ पाएगा! इसीलिए कहा गया है कि अरबस्तानी घोडा दुबला पतला हो, तब भी गधों की टोली से लाख गुना अच्छा है। धग्लेबंद स्टाफ या ऊँचे पगारदार अधिकारीयों कि फ़ौज से अनुभवी एवम कर्मयोगी छोटा स्टाफ कहीं अच्छा। काफी सारी ऑफिस के कामगारों को ऐसा कहते हुए सुना है कि हमारी ऑफिस में तो मौज है, बैठे बैठे टाइम बी पास नहीं होता आदि। ऐसा वातावरण भी विनाश कि निशानी है!
पारिवारिक जीवन में भी ऐसा देखने को मिलता है। घर का मुखिया किसी सुयोग्य व्यक्ति को जिम्मेदारी सौपने के बदले चाहे जिसे चाहे जैसा काम सौप देता है परिणामस्वरुप घर को नुकसान सहन करना पड़ता है। इससे विरुद्ध कई बार सुयोग्य व्यक्ति पे इतनी सारी जिम्मेदारियां थोप दी जाती है कि योग्यता होने के बावजूद भी काम के तनाव में वह कोई भी काम को पूर्णतया न्याय नहीं दे पाटा। मुखिया का काम अधिकार प्रियता नहीं बलके अधिकारों का छोटों में योग्य वितरण है। बैठे हुए व्यक्ति को बेकार गिनने के बदले उसकी योग्यता अनुसार उससे काम न ले सकने वाले को बेकार गिनना चाहिए। व्यवस्थातंत्र में उपरी अधिकारी अपना 'रूआब' दिखाने के लिए छोटे व्यक्तियों को अपमानित करते हैं। निरिक्षण कर मार्गदर्शन देना यह एक बात है और अपने रूआब प्रदर्शन के लिए मात्र दूसरों के 'दोषों' को दिखाना यह दूसरी बात है। 'विजन' बिना सुपरविजन यह निष्प्राण क्रियाकांड है!
उस फैक्ट्री में बिना विजन वाले अधिकारी थे। इसलिए कर्मचारी और कारीगरओं में असंतोष रहता था। परिणामस्वरुप सभी दुखित मन से काम करते थे। यह बात उस अधेड़ के ध्यान में आ गयी।
मालिक को सदा अपनी आँख खुली रखने के बजाय कभी अंधत्व (अनदेखा) भी धारण कर लेना चाहिए। ऐसी चिन्तक फुलेर कि कही हुई बात में तथ्य है। व्यक्ति प्रायः आँखों का उपयोग 'गुण दर्शन' के लिए नहीं पर 'दोष दर्शन' के लिए करता है। उस फैक्ट्री का मालिक और उसके पुत्र कर्मचारियों के दोषों को 'मेग्निफाय' करने का ग्लास तैयार रखते! परिणामस्वरूप कारीगरों और कर्मचारियों को उन पर विश्वास नहीं था। कोई तुम्हे विश्वासपात्र नहीं माने ये भी एक बड़ा अभिशाप है । स्टाफ के लिए प्रगति के द्वार हमेशा खुले होने का विश्वास स्टाफ कि कार्यशक्ति में अपने आप वृद्धि कर देता है। विकास में पिछड़ी हुई उस फैक्ट्री में इस बात की कमी थी, ये अधेड़ ने जान लिया था। जिसप्रकार परिवार में होता है ठीक वैसे ही व्यवसाय अथवा फैक्ट्री सञ्चालन में अधिक कार्यक्षमता वाले को आप शाबाशी दीजिये परन्तु कम कार्यक्षमता वाले को बेइज्जत करेंगे तो असंतोष उत्पन्न होगा। काम करने वाले से गलतियाँ तो होगी ही। परन्तु कर्मचारी द्वारा हुई गलती को मालिक या उपरी अधिकारी 'राई का पहाड़' बनाकर गलती करने वाले को सतत धमकता ही रहेगा तो कर्मचारी भयग्रस्त रहता है।
मालिक या उपरी अधिकारी कि वक्रता जितनी कारगर साबित नहीं होती उससे अधिक कारगर साबित होती है उसकी नम्रता! कर्मचारी को आत्मीयता कि अनुभूति कराओ तो वह सही अर्थ में सेवक बन जाता है! 'अक्कड़' बॉस के बदले 'फक्कड़' बॉस कारीगरों और कर्मचारियों के दिलों में बस जाया करता है। समस्याओं को जमा करने के बदले उनका त्वरित नीकाल ये ही श्रेष्ठ अभिगम है। किसीने इसीलिए बड़ा सही कहा है कि दुनिया कि सबसे बड़ी आग योग्य समय पर एक प्याला पानी डाअल कर भी बुझाई जा सकती है।
अधेड़ ने उपरोक्त कारणों को ध्यान में लाता हुआ मार्गदर्शन उस समस्या ग्रस्त फैक्ट्री के मालिक को दिया और एक वर्ष में ही फैक्ट्री नुकसान में से भारी नफा कमाने वाली फैक्ट्री-लिस्ट में शामिल हो गयी।

हमारे सम्बन्ध, हमारे निर्णय, हमरा अभिगम यदि संकुचित होगा तो जीवन निष्प्राण बन जाएगा। व्यक्ति को क्षुद्र लालच और सहज ख़ुशी दोनों में से एक को पसंद करना हो तो व्यक्ति ने लालच को जाने देना चाहिए।

श्रेष्ठ प्रबंधक कौन ? जो खुद अपने हाथ के निचे वाले व्यक्तियों को प्रतीति करा सके कि खुद कि उन्नति में ही कर्मचारियों कि उन्नति शामिल है।